बुधवार, 26 जुलाई 2017
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सोमवार, 10 जुलाई 2017
चांद बेखबर
ऐ चांद बेखबर मुस्कुराता है तू अगर तो सुन ऐ मुसाफिर तेरी मंजिल है दर बदर जानता है तू क्यूं है बेकदर तेरे जानिब का वक्षस्थल इतना विशाल है तेेरे आने की उसको नही होती है कोई खबर
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