मै दरियाये सैलाब हूं
बे आवाज बहती जाउंगी
पत्थरों के बीच से टकरा कर
चूर हो जाउंगी
और टूटे हुये जिस्म को लेकर
आगे बढ़ जाउंगी
जाना तो है
रास्ता भी है
थोड़ा दुर्गम है
थोड़ा कष्ट भरा है
इन कष्टों के बीच में से
अपनी खिलखिलाने की आवाज
सुना जाउंगी
जरूरत है उन लोगो को जो थके है
थक गये है क्यों की गन्दे हो गये है
उसे धोने के लिये
मेरा चलना जरूरी है
मेरा बहना जरूरी है